पश्चिम क्षेत्रीय भाषा केंद्र में हिंदी दिवस समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न
पुणे : पश्चिम क्षेत्रीय भाषा केंद्र, भारतीय भाषा संस्थान, शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार, डेक्कन कॉलेज परिसर, पुणे में 22 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का समन्वय मराठी व्याख्याता श्रीमती सुजाता भुजंग ने किया।
समारोह में पश्चिम क्षेत्रीय भाषा केंद्र के प्रा. जीवत केसवानी (सिंधी), प्रा. हिना महाले (गुजराती), प्रा. बबीता देसाई (कोंकणी), प्रा. स्वप्निल जोशी (मराठी) तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष सुश्री दुर्गा मजूमदार सहित मराठी, गुजराती, सिंधी एवं कोंकणी भाषाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षक-प्रशिक्षार्थी और कार्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सूत्र-संचालन भाषा-प्रशिक्षार्थी श्री सौरव रॉय ने किया। उन्होंने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हिंदी सहित भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना, भाषाई एवं सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करना तथा लोगों को भारतीय भाषाओं के अध्ययन के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि भारत की विभिन्न भाषाएँ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं। भाषाओं के अध्ययन के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सद्भावना एवं अखंडता की भावना को और मजबूत किया जा सकता है।
समारोह में सर परशुरामभाऊ कॉलेज, पुणे के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. गोरख थोरात विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वे प्रख्यात हिंदी विद्वान एवं अनुवादक हैं तथा भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के करकमलों से सम्मानित हो चुके हैं।
डॉ. थोरात ने हिंदी भाषा एवं साहित्य पर ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। उन्होंने हिंदी भाषा के विकास, उसके महत्व तथा देश-विदेश में हिंदी की बढ़ती पहचान पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा, विविध साहित्यिक विधाओं तथा समाज निर्माण एवं सामाजिक चेतना के विकास में साहित्य की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने आधुनिक संदर्भ में हिंदी भाषा एवं साहित्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा, समाज, संस्कृति और संचार के क्षेत्र में हिंदी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षार्थियों को हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन के प्रति रुचि और सम्मान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उनका व्याख्यान उपस्थित प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा।
इस अवसर पर प्रा. जीवत केसवानी ने विशेष अतिथि डॉ. गोरख थोरात का परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके शैक्षणिक एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में गुजराती भाषा-प्रशिक्षार्थी श्रीमती स्वामी रत्नमाला ने आभार व्यक्त किया तथा समारोह को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, शिक्षक-प्रशिक्षार्थियों एवं कर्मचारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
जलपान के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें रत्नमाला स्वामी, श्रीपती जमाले, सौरव रॉय, जान्हवी निवसरकर, उषा राठवा, हर्षदा देशमाने एवं मोनिका बोला सहित प्राध्यापकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षार्थियों ने हिंदी तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं में गीत, ग़ज़ल और कविताओं की सुंदर प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों ने समारोह को जीवंत एवं मनोरंजक बना दिया और भारतीय भाषाओं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सुंदर परिचय कराया।
समारोह के अंत में निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के संगम के बीच हिंदी भाषा एवं साहित्य के महत्व को रेखांकित करते हुए हिंदी दिवस समारोह का सफलता पूर्वक समापन हुआ।
