डीजे का शोर नहीं, लापरवाही बनी मौत का कारण!

जुनी सांगवी में हंगिंग साउंड सिस्टम का लोहे का स्टैंड महिला पर गिरा; 45 वर्षीय सलमा पठाण की दर्दनाक मौत

पिंपरी-चिंचवड़ : दहीहंडी उत्सव के जश्न के बीच पिंपरी-चिंचवड़ के जुनी सांगवी इलाके में हुई दर्दनाक दुर्घटना ने उत्सवों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दहीहंडी कार्यक्रम समाप्त होने के बाद हंगिंग साउंड सिस्टम सहित लोहे का भारी स्टैंड अचानक गिर पड़ा। इसकी चपेट में आने से 45 वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठाण की मौत हो गई। यह हादसा 4 सितंबर की रात करीब साढ़े दस बजे हुआ।

जानकारी के अनुसार, जुनी सांगवी स्थित विघ्नहर्ता दहीहंडी मंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम के लिए हंगिंग साउंड सिस्टम लगाया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद नागरिक अपने घरों की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान साउंड सिस्टम को सहारा देने वाला लोहे का स्टैंड अचानक भरभराकर नीचे गिर गया और सलमा पठाण उसकी चपेट में आ गईं।

हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से इलाके में शोक की लहर है।

दो गिरफ्तार, मंडल अध्यक्ष पर भी मामला

दुर्घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मंडप और साउंड सिस्टम से संबंधित मेहबूब उर्फ सैम रमजान शेख और कुणाल अनिल भोगावड़े को गिरफ्तार किया है। वहीं, दहीहंडी मंडल के अध्यक्ष के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

उत्सवों में सुरक्षा आखिर कितनी गंभीर?

इस हादसे ने उत्सवों के दौरान लगाए जाने वाले भारी-भरकम डीजे स्ट्रक्चर, हंगिंग स्पीकर, लोहे के स्टैंड और मंडपों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे स्ट्रक्चर लगाने से पहले उनकी मजबूती, भार सहने की क्षमता, तकनीकी जांच, उचित एंकरिंग और आवश्यक अनुमतियों की जांच कितनी गंभीरता से की जाती है, यह सवाल अब सामने आया है।

उत्सव आनंद और उल्लास के लिए होते हैं, लेकिन नागरिकों की जान जोखिम में डालकर जश्न मनाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। एक कथित लापरवाही ने एक महिला की जान ले ली और एक परिवार को अपूरणीय दुख दे दिया।

आगामी उत्सवों में कड़ी जांच की मांग

पिंपरी-चिंचवड़ में आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव होने वाले हैं। ऐसे में नागरिकों ने मांग की है कि डीजे और साउंड सिस्टम, लोहे के स्ट्रक्चर, मंडप तथा विद्युत व्यवस्था की तकनीकी और सुरक्षा जांच के बाद ही अनुमति दी जाए।

अब सवाल सिर्फ डीजे की आवाज की तीव्रता का नहीं, बल्कि उस आवाज के पीछे खड़े पूरे स्ट्रक्चर की सुरक्षा का है। उत्सव की खुशी किसी परिवार के लिए मातम में न बदले, इसके लिए आयोजकों और संबंधित प्रशासन को समय रहते सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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